फायनेंस कंपनी को एक माह के भीतर देना होगा वाहन या मूल्य, किश्त नहीं पटने की बात कहकर वाहन लेकर बेच दी थी, उपभोक्ता फोरम का अहम फैसला

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जांजगीर-चांपा. फायनेंस कराए गए बोलेरो वाहन को कंपनी द्वारा समय पर किश्त नहीं पटाने की बात कहते हुए अपने आधिपत्य में ले लिया गया और दूसरे को विक्रय कर दिया। मामले को लेकर उपभोक्ता फोरम में प्रस्तुत किए गए वाद पर फैसला सुनाते हुए आदेशित किया गया है कि फायनेंस कंपनी को एक माह के भीतर आवेदक को फायनेंस किए गए वाहन या उसका मूल्य देना होगा। साथ ही आवेदक को मानसिक क्षतिपूर्ति बतौर 50 हजार रुपए व वादव्यय स्वरूप 3000 रुपए एक माह में देना होगा।

आवेदक से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम कनकपुर थाना बम्हनीडीह निवासी चंद्रिका प्रसाद चंद्रा पिता पंचराम द्वारा कोरबा स्थित एयू स्माल फायनेंस कंपनी से बोलेरो वाहन फायनेंस कराया गया था। वाहन को क्रय करने कंपनी द्वारा 5 लाख 70 हजार रुपए फायनेंस किया गया था, जिसका 13864 रुपए प्रतिमाह किश्त निर्धारित था। बोलेरो क्रमांक सीजी 11 एसी 4622 का किश्त चंद्रिका प्रसाद द्वारा 31 मार्च 2017 तक पटाया गया, लेकिन इसके बाद किश्त समय पर नहीं पटाने के कारण फायनेंस कंपनी द्वारा वाहन को अपने आधिपत्य में ले लिया गया और दूसरे को बिक्री कर दिया गया, जिसकी सूचना विधिवत क्रेता को नहीं दी गई, इससे क्षुब्ध होकर क्रेता चंद्रिका द्वारा उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया गया, जहां सभी पक्षों की सुनवाई के बाद फोरम के अध्यक्ष बीपी पांडेय, सदस्य मनरमण सिंह, श्रीमती मंजूलता राठौर द्वारा फैसला सुनाया गया कि फायनेंस कंपनी द्वारा सेवा में कमी की गई है। इसके कारण कंपनी को संबंधित वाहन अथवा आधिपत्य के समय वाहन के मूल्य व जमा की गई किश्त की रकम एक माह के ऽाीतर आवेदक को भुगतान करना होगा. साथ ही आवेदक को मानसिक क्षतिपूर्ति बतौर 50 हजार रुपए व वादव्यय स्वरूप 3000 रुपए एक माह में देना होगा।

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