नज़रिया:खुशियां ढूंढने की आदत बना लीजिए… @ पूजा अग्रवाल

0
254

दोस्तों हर व्यक्ति का किसी चीज या घटना को देखने का एक अलग नज़रिया होता है। हमारा नज़रिया ही हमारे जीवन का निर्माण करता है।किसी को किसी परिस्थिति में मुश्किले नज़र आती है तो किसी को उसी परिस्थिति में अवसर नज़र आता है। जब हम सकारात्मक नज़रिए से चीज़ों को देखने लगेंगे तो हर चीज़ में अवसर ढूंढने की आदत अपने आप पड़ जाएगी।देखिये कोई भी मुश्किल घड़ी में 2 ही विकल्प होते है या तो हम सिर पकड़ कर बैठ जाएं या दूसरा सकारात्मक नज़रिए से देख उसमे कोई अवसर ढूंढे।मान लीजिए आपके पास कोई ऐसा काम आ गया है जो आपने पहले नही किया है तो या तो आप उस परिस्थिति को कोसते रहिए या फिर इसमें कोई नया अवसर ढूंढ कर उस काम को बेहतर तरीके से करने में जुट जाइए। देखिये इंसान का नज़रिया ही उसे कामयाब या नाकामयाब बनाता है।

किसी भी कामयाबी में सबसे महत्वपूर्ण हाथ आपके नज़रिए का ही होता है।क्योंकि नकारात्मक नज़रिए वाला व्यक्ति सब कुछ होते हुए भी हमेशा दुखी रहेगा। वो न तो बिज़नेस में सफल हो सकता है और ना ही जीवन के किसी और क्षेत्र में। वो खुद भी दुखी रहेगा और अपने आसपास रहने वाले व्यक्तियों को भी दुखी करेगा। कोई भी व्यक्ति ऐसे व्यक्ति के संपर्क में नही रहना चाहेगा जो हमेशा नकारात्मक बाते ही कहता हो।हमारी परिस्थितियों और हमारे आसपास के माहौल का बहुत बड़ा हाथ होता है हमारे नज़रिए के बनने में। लेकिन किसी कारणवश चीजो को नकारात्मक तरीके से देखने की आदत बन भी चुकी है तो हमें तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।दिन की शुरुआत सकारात्मक सोच से करे। खुद से वादा करे की मुझे सब अच्छा सोचना है। बुरी संगत से दूर रहे।हर छोटी छोटी चीज़ों में खुशियां तलाशने की कोशिश करे। खुद भी हंसे औरो को भी हंसाये। जितना आप औरो को खुशियां बांटेंगे खुद के जीवन में उतनी अधिक खुशियां आएंगी। आप प्रसन्न रहेंगे तो स्वस्थ्य भी रहेंगे। खुशनुमा लोगो के साथ भला कौन नही रहना चाहेगा। प्रकृति का नियम है हम जो चीज बांटते है हमारे पास वही लौट कर आती है खुशिया प्रेम और सम्मान बांटेंगे तो हमारे पास वही सब लौट के आएगा। दुख निराशा नकारात्मकता बाटेंगे तो यही लौट के आएगा। जब भी किसी व्यक्ति से मिले एक बड़ी सी स्माइल के साथ मिले।इस जीवन में आपका सबसे पहला उद्देश्य तो प्रसन्न रहना ही होना चाहिए। बस ये समझ लीजिए कि जब आप प्रसन्न हो रहे है मतलब ईश्वर की पूजा कर रहे है। जब आप किसी के चेहरे पे मुस्कान बिखेर रहे है तो आप ईश्वर की पूजा कर रहे है। और जब आप खुश रहने की आदत डालेंगे तो हर परिस्थिति में मुश्किलो की जगह अवसर ढूंढने लगेंगे हर मुश्किल का सामना आत्मविश्वास के साथ करेंगे। और जब हम सकारात्मक नज़रिए की आदत खुद में विकसित कर लेंगे तो क़ामयाबी खुद ब खुद हमारे कदम चूमेगी। क्योकि पॉजिटिव सोच पॉजिटिव लोगो और हालातों को आकर्षित करती है। तो बस आज से ही जीवन की छोटी छोटी चीजों में खुशियां ढूंढने की आदत बना लीजिए। चलो न हम मुस्कुरानें की वज़ह ढूंढ लाये, न बीते कल की बातें हमको रुला पाएंन आने वाले कल की कोई चिंता सतायेचलो न हम मुस्कुरानें की वज़ह ढूंढ लाएं. कितना कुछ है इस पल में इसे न गंवाएफूल महक रहे बागों में जिनकी खुशबू लुभाएचलो न हम मुस्कुरानें की वज़ह ढूंढ लाएं. थोड़ी बारिश है फिर कागज़ की कश्ती बनायेक्यों न दोस्तो संग आज कॉफी ही पी जाएंचलो न हम मुस्कुरानें की वज़ह ढूंढ लाएं. फेवरेट ड्रेस रखी अलमारी में क्यों न पहनी जाएंक्यों न ख़ास सज संवर के घर से निकला जाएंचलो न हम मुस्कुरानें की वज़ह ढूंढ लाएं. वैसे मॉल ज़्यादा दूर तो नही है न घर सेक्यों न आज कोई फ़िल्म ही देख ली जाएंचलो न हम मुस्कुरानें की वज़ह ढूंढ लाएं

पूजा अग्रवाल, रायपुर, छत्तीसगढ़

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here