जिसकी लागी रे लगन भगवान में, उसकी दिया भी जलेगा तूफान मेंः कृष्णाचार्य

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जांजगीर-चांपा। निर्गुण और सगुण में कोई भेद नहीं है। निराकार और साकार में कोई अंतर नहीं है। निराकार ही साकार और निर्गुण ही सगुण बनता है। ये बातें निकुंज आश्रम श्रीधाम अयोध्या से पधारे हुए जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी रामकृष्णाचार्य ने शिवरीनारायण मठ महोत्सव में राम कथा का रसपान कराते हुए श्रोताओं के समक्ष तीसरे दिवस अभिव्यक्त कही।

आपकों बता दें कि शिवरीनारायण मठ महोत्सव 23 नवंबर से प्रारंभ हुआ है इसके तीसरे दिवस व्यासपीठ की आसंदी से विद्वान आचार्य ने कहा कि जिन्हें कुछ भी नहीं आता वही कहते हैं कि ब्रह्म राम और दशरथ के बेटे राम अलग-अलग हैं। एक राम दशरथ का बेटा, एक राम घर घर में लेटा वस्तुतः जो दशरथ नंदन है वही व्यापक घट-घटवासी राम है, जो निर्गुण ब्रह्म है वही सगुण होते हैं, निर्गुण और सगुण में कोई भेद नहीं है निराकार और साकार में कोई अंतर नहीं है। निराकार ही साकार और निर्गुण ही सगुण बनता है। जिससे आकार निकलता हो उसे ही निराकार कहते हैं जब निराकार परमात्मा राम, कृष्ण, वामन भगवान आदि रूप में निराकार से कोई साकार रूप धारण कर प्रकट होता है। वही साकार है पानी की द्रवीभूत अवस्था जल है और घनीभूत अवस्था बर्फ है। जल को जिस आकार के पात्र में रख दें वह घनीभूत होकर वही आकार धारण करता है इसके लिए उसमें अलग से किसी अन्य तत्व को मिलाने की आवश्यकता नहीं होती। धर्म की स्थापना ही भगवान के अवतार के मूल कारण है भगवान के दो द्वारपाल हैं जय और विजय, यदि हमें ईश्वर तक पहुंँचना है तो अपने इंद्रिय पर जय और मन पर विजय करना होगा जय और विजय तीनों जन्म में राजा बने, एक बात साफ है कि आप एक बार भगवान के हो गए तो यदि आप का पतन भी हो जाए तो भी आप ऊंचाई पर ही रहेंगे। मंच पर शिवरीनारायण पीठाधीश्वर राजेश्री डॉक्टर महन्त रामसुन्दर दास महाराज विराजित थे। इनके अतिरिक्त देश के अनेक स्थानों से आए हुए संत महात्मा एवं श्रोता बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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