जिले में अवैध प्लाटिंग की भरमार, गहरी नींद में सो रहा जिला प्रशासन, प्लाटिंग के फेर में सरकारी व नजूल भूमि भी नहीं सुरक्षित…

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जांजगीर-चांपा। जिला प्रशासन की उदासीनता से जमीन का अवैध कारोबार करने वालों की मौज है। किसी भी सरकारी, नजूल और कृषि भूमि का मनमाना उपयोग कर ग्राहकों को थमा दे रहे हैं। बताया जा रहा है जिला मुख्यालय जांजगीर और चांपा में अवैध प्लाटिंग के सर्वाधिक मामले है। इस तरह के मामले लगातार प्रकाश में आ रहे हैं। प्र्रशासन तक भी खबर पहुंच रही है, फिर भी राजस्व अफसरों का मौन रहना उनकी भी संलिप्तता की ओर इशारा करता है।

आपकों बता दें कि पूर्व कलेक्टर एस भारतीदासन ने जिले के सभी एसडीएम को अवैध प्लाटिंग के मामले में कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। हालांकि किसी भी एसडीएम ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद किसी भी कलेक्टर ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। जबकि जांजगीर के खोखसा फाटक, मुनुंद रोड, शहर सहित चांपा में कैलाश नगर, तहसील रोड, तहसील के पीछे, मनका पब्लिक स्कूल सहित गली कूचों में अवैध प्लाटिंग है। बताया जाता है अवैध प्लाटिंग कर मुनाफा कमाने के फेर में ये लोग सरकारी व नजूल भूमि को भी नहीं बख्श रहे हैं। इस कारोबार से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि कृषि भूमि को औने-पौने दाम में खदीकर ये लोग इसी भूमि को कई गुना लाभ कमाकर बेच रहे हैं, जबकि अपनी कृषि भूमि को थमाने के बाद ये लोग रकम के लिए जमीन दलाल का चक्कर काट रहे हैं। आपकों बता दें कि कोई भी व्यक्ति इस तरह प्लाटिंग नहीं कर सकता। सरकार ने शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में प्लाटिंग करने के कई नियम बनाए है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्लाटिंग के लिए एसडीएम और शहरी क्षेत्रों में प्लाटिंग के लिए नगरीय निकाय के सीएमओ से विधिवत अनुमति अनिवार्य है। इसके अलावा कुल प्लाटिंग का 15 प्रतिशत भूमि या इसका मूल्य संबंधित पंचायत व निकाय में जमा होना चाहिए, जिसका उपयोग जनहित में किया जाना है लेकिन दलाल अपना लाखों बचाने के फेर में संबंधितों से मिलीभगत कर अपने काले कारनामे को अंजाम दे रहे हैं।

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