चांपा में कलशयात्रा के साथ विष्णु यज्ञ प्रारंभ

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जांजगीर-चांपा। हिंदू धर्म शास्त्रो-पुराणों में कार्तिक मास को श्रेष्ठ, उत्तम और पवित्र माना गया है। इस पूरे माह व्रत, दान-पुण्य, पवित्र-नदियों का स्नान, रामकथा, भागवत कथा, लक्ष्मीनारायण महायज्ञ और कथा-पुराणों का श्रवण भी अति-उत्तम माना गया है।

यह सुखद संयोग है कि श्रीमद जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योर्तिंमठ शाखा काशीपीठ मौनी महराज शाश्वत आनंद आश्रम, हनुमान धारा, चांपा में श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ विष्णु महायज्ञ और श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन 04 से 12 नवंबर कार्तिक पूणिमा तक किया जा रहा है। आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस महायज्ञ में देश के विभिन्न स्थानों से साधु संतों का आगमन शुरू हो गया है। कलश भारतीय संस्कृति का सर्वोंय तथा सम्मान का प्रतीक माना जाता हैं। देवपूजा के पूर्व सबसे पहले कलश में पवित्र नदी का जल-भरा जाता हैं। उसके पश्चात् कलश पूजन का शुभारंभ होता हैं। इसी उद्देश्य को लेकर डोगाघाट मंदिर, चांपा से पूजन उपरांत विधिवत कलश यात्रा प्रारंभ हुई। आज चांपा में भव्य कलश-यात्रा निकाली गई। इसके साथ श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ शुरू हो गया। कलशयात्रा में काशी पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी शास्वतानंद सरस्वती महराज बद्रीकाश्रम उत्तराखंड के सानिध्य में रवाना हुआ। यह कलश यात्रा सदर बाजार, सम्लेश्वरी मंदिर, कदम-चौक, बड़े मठ, राजापारा होते हुए हनुमान धारा पहुंची।

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