कागज में वीरान तो असल में 1100 आबादी, बम्हनीडीह विकासखंड का अजीबो गरीब गांव मौहाडीह…

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जांजगीर-चांपा। जिले के बम्हनीडीह ब्लाक का एक ऐसा गांव मौहाडीह, जिसे षड्यंत्र कर रिकॉर्ड में वीरान घोषित कर दिया गया है, लेकिन धरातल पर इस गांव की आबादी 11 सौ से अधिक है। वीरान गांव होने के कारण यहां के ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं जबकि रिकार्ड में इस गांव के लिए लाखों रुपए सेंशन हो गया है। लेकिन वह राशि कहां गई किसी को नहीं पता।

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत सिलादेही के आश्रित ग्राम मौहाडीह को वर्ष 2011 में षड़यंत्रपूर्वक राजस्व रिकार्ड में वीरान घोषित कर दिया गया। इसके चलते शासन ने यहां विकास के लिए बजट देना बंद कर दिया। लेकिन तथ्यों के मुताबिक वर्ष 2011 से अब तक विकास कार्य के लिए लाखों रुपए सेंशन हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि शासन-प्रशासन एक तरफ मौहाडीह को वीरान मानता है तो दूसरी तरफ विकास के लिए रकम भी जारी करता है। यह विरोधाभास लोगों के समझ से परे है। इस गांव के लोग अर्से से पक्की सड़क के लिए तरस रहे है तो वहीं बांस के सहारे बिजली का विस्तार किया गया है। गांव में पेयजल तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। हमारी टीम जब वीरान गांव मौहाडीह का जायजा लेने पहुंची तो पूरा गांव एकजुट था। बड़ी संख्या में ग्रामीण हाथ में तख्ती लेकर मौहाडीह को अलग पंचायत घोषित करने नारेबाजी करने लगे। जिस तरह इस गांव को वीरान कर यहां के ग्रामीणों को नारकीय जीवन जीने मजबूर किया गया, उसमें अफसरों की अहम भूमिका है। अब देखना होगा कि यह मामला सामने आने के बाद इस गांव की तस्वीर बदलती है कि नहीं।

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