अस्तित्व की लड़ाई लड़ाई लड़ता हमारा चांपा नगर – अहिबरन पटेल…

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यूं तो कहने को तो चांपा नगर जांजगीर-चाम्पा जिले का सबसे बड़ा शहरों में कोसा, कांसा, और कंचन की नगरी के नाम से जाना जाता है। साथ ही राजस्व देने में भी चांपा सबसे आगे है। उसके बावजूद भी आज चांपा नगर अपनी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।

यहां चांपा जक्शन को अ श्रेणी का दर्जा प्राप्त तो हुआ है, मगर सुविधा केवल नाममात्र का है, वही स्टेशन परिसर के आसपास बेजाकब्जाधारियों को हटाने में भी प्रशासन नाकाम है। यहां सुविधाओं के नाम पर हैण्डलूम कॉलेज, कुछ सरकारी ऑफिस, जल संसाधन विभाग इत्यादि को सौंपकर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। खेल के नाम पर एकमात्र खेल मैदान भलेराय स्टेडियम राजनीति का आखाडा बना रहता है। सड़को का हाल भी कोई खासा नही है।

चांपा शहर को पानी दिलाने एवं अन्य मुद्दों पर आवज उठाने वाले शहीद राजकिरण दुग्गड़ उधान अब कचरे का ढेर साबित हो रहा है। आखिर कब तक, कब तक उपेक्षित रहेगा, चांपा नगर कब संवरेगी चांपा नगर की तकदीर।

लेख – अहिबरन पटेल

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