अपने विचारों पर नियंत्रण रखना बहुत जरूरी है… @ पूजा अग्रवाल

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दोस्तों हमारे विचार ही हमारे जीवन का निर्माण करते है। इसीलिए अपने विचारों पर नियंत्रण रखना बहुत जरूरी है। हम क्या सोचते है और क्या बोलते है उसका हमारे आसपास की परिस्थितयों के निर्माण में बहुत बड़ा हाथ होता है।

हमारे दिमाग मंे एक दिन में लगभग 60 हज़ार से अधिक विचार आते है। सब पर नियंत्रण नहीं रखा जा सकता पर हां हम खुद को नेगेटिव सोचने से तो रोक ही सकते है। नेगेटिव बातों को बार बार सोचने से अगर वो न होने वाले होंगे तो भी घटित हो जाएंगे क्योकि हमारे विचार ब्रह्मांड तक जाते है और जैसा हम सोचते है उसी तरह की परिस्थितियां वहां से हमारे जीवन में आने लगती है। जितने भी महान दार्शनिक हुए उनकी बातों का अगर हम सार देखें तो यही है कि विचार बनाये हमारी जिंदगी। बुरी चीजों की उम्मीद करेंगे तो वही आएंगी। अच्छी चीजो की उम्मीद करेंगे तो अच्छे लोग और अच्छे हालातों, जीवन की तमाम खुशियों को हम आकर्षित करेंगे। एक बार गौतम बुद्ध अपने शिष्यों को एक कहानी सुनाते है।

एक बार एक गांव में एक बहुत बड़ा सेठ रहता है और वो दिन रात धन कमाने में लगा रहता था। तभी उसके घर उसका एक मित्र आता है और उसे कहता है कि हमारे गांव में एक सेठ था वो तुमसे भी ज्यादा धनी था पर अब वो नहीं रहा। सेठ पूछता है क्यो क्या वो बीमार था तो उसने कहा नहीं वो बीमार नहीं था। पता नहीं कैसे ख़त्म हो गया। सेठ सोचता था कि इंसान या तो बुढ़ापे से या दुर्घटना या बीमारी से ही मरता है। अब सेठ को भय सताने लगता है कि कही उसकी भी मृत्यु न हो जाए। अगर ऐसा हुआ तो उसके कमाए हुए धन का क्या होगा। वो दिन रात अब यही सोचने लगा। पहले वो खुश रहता था। अब दुखी रहने लगा। धीरे धीरे वो बहुत कमजोर होकर बीमार पड़ने लगा। तभी उसके एक नौकर से अपने मालिक की ये हालात न देखी गई और वो एक ऐसे संत को ले आया जिसके पास सभी समस्याओं का हल था।

संत ने उससे पूछा कि तुम्हे क्या हुआ। सेठ ने कहा कि मैं मरना नहीं चाहता। मेरे धन का क्या होगा। संत पूरी बात समझ जाता है। और सेठ से कहता है तुम नहीं मरोगे मैं तुम्हे एक मंत्र देता हूं, जिसे तुम्हे सात दिन तक बोलना है। वो मंत्र था जब तक मेरी मृत्यु नहीं आएगी मैं तब तक जीऊंगा। सेठ अब लाइन दोहराने लगा और धीरे धीरे वो फिर स्वस्थ्य हो गया। उसकी चिंता खत्म हो गई। कुछ दिन बाद फिर संत उससे मिलने आया। सेठ ने कहा आपका बहुत धन्यवाद। अब मैं पहले जैसा अच्छा हो गया हूं। तो दोस्तों हम जैसा सोचते है और जैसा बोलते है हमारा जीवन वैसा ही बनने लगता है। इसलिए हमेशा अच्छा सोचे। सकारात्मक सोचे और अच्छा बोले क्योकि वो सच हो जाएगा।

-पूजा अग्रवाल, रायपुर छत्तीसगढ़

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